
14 अक्टूबर 2026 को बिहार के खाद्य सुरक्षा विभाग ने पटना ज़िले के संपतचक, सोनागोपालपुर और गौरीचक इलाक़ों में पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर के पाँच प्रतिष्ठानों की जाँच की और लगभग 3.08 लाख रुपये मूल्य का 15,340 लीटर पानी ज़ब्त किया। यह जानकारी Patna Press और 22Scope ने 14-15 अक्टूबर 2026 को दी। एक यूनिट में बोतलों पर "Beslari", "Bislari Herbal Water" और "Bislferi" जैसे नाम छपे थे।
इस पूरे अभियान पर हमने UP और बिहार कार्रवाई वाले लेख में लिखा था। यह गाइड एक सीमित सवाल पर है: आपकी बोतल पर कौन-सा नाम जाए, और उस पर कौन-से क़ानून लागू होते हैं।
पटना में जाँच में क्या मिला
दोनों रिपोर्टों के अनुसार पाँच में से कई यूनिटों के पास वैध फ़ूड लाइसेंस नहीं था। एक यूनिट बंद की गई, एक में उत्पादन रोका गया, और कानूनी नमूने फ़ूड लैब भेजे गए। जिस यूनिट में मिलते-जुलते नाम मिले, वहाँ रिपोर्टों के अनुसार अलग-अलग ब्रांडों के रैपर और लेबल इस्तेमाल हो रहे थे, और लाइसेंस व खाद्य सुरक्षा मानकों को लेकर कार्रवाई शुरू की गई।
जम्मू-कश्मीर में भी लेबल से जुड़ा मामला सामने आया। Kashmir Observer ने 28 सितंबर 2026 को बताया कि FDA ने पुलवामा के IGC लस्सीपोरा में एक पैकेज्ड वाटर यूनिट सील की, क्योंकि बोतलों पर छपा लाइसेंस नंबर पानी की प्रोसेसिंग के लिए नहीं, फल-सब्ज़ी के व्यापार के लिए जारी हुआ था। इस मामले को हमने लाइसेंस स्कोप गाइड में समझाया है।
बोतल के नाम पर दो क़ानून लागू होते हैं
खाद्य क़ानून। खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 की धारा 3(1)(zf) "मिसब्रांडेड फ़ूड" की परिभाषा देती है। इसमें वह पैक्ड खाद्य शामिल है जो किसी दूसरे खाद्य की नकल हो या धोखा देने वाले ढंग से उससे मिलता-जुलता हो (जब तक लेबल पर उसका असली स्वरूप साफ़ न लिखा हो), और वह खाद्य भी जो झूठे या भ्रामक दावों के साथ बेचा जाए। धारा 52 के तहत मिसब्रांडेड फ़ूड बनाने, रखने, बेचने या बाँटने वाले पर 3 लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है, और न्यायनिर्णायक अधिकारी लेबल सुधारने या माल नष्ट करने का आदेश दे सकता है।
ट्रेडमार्क क़ानून। ट्रेड मार्क्स अधिनियम, 1999 के तहत रजिस्टर्ड मार्क का मालिक धोखा देने वाले मिलते-जुलते मार्क पर उल्लंघन (इन्फ्रिंजमेंट) का दीवानी मुक़दमा कर सकता है, और अनरजिस्टर्ड मार्क का मालिक "पासिंग ऑफ़" की कार्रवाई कर सकता है। इसके अलावा धारा 103 के अनुसार ट्रेड मार्क की जालसाज़ी करना या उसे झूठे तरीक़े से माल पर लगाना अपराध है: छह महीने से तीन साल तक की क़ैद और 50,000 से 2 लाख रुपये तक जुर्माना, जब तक व्यक्ति यह साबित न करे कि उसकी मंशा धोखाधड़ी की नहीं थी।
| बोतल पर समस्या | क़ानून | संभावित नतीजा |
|---|---|---|
| ऐसा नाम या लेबल जो किसी दूसरे उत्पाद की नकल हो | FSS अधिनियम, धारा 3(1)(zf) और 52 | 3 लाख रुपये तक जुर्माना; लेबल सुधारने या माल नष्ट करने का आदेश |
| किसी और का ट्रेड मार्क झूठे तरीक़े से लगाना | ट्रेड मार्क्स अधिनियम, धारा 103 | 6 महीने से 3 साल क़ैद और 50,000 से 2 लाख रुपये जुर्माना |
| किसी मौजूदा मार्क से धोखा देने वाला मिलता-जुलता नाम | ट्रेड मार्क्स अधिनियम (उल्लंघन या पासिंग ऑफ़) | मार्क मालिक द्वारा दीवानी कार्रवाई |
| पैकेज्ड वाटर के वैध लाइसेंस के बिना पैकिंग | FSS अधिनियम, धारा 31 और 63 | सीलिंग और अभियोजन, जैसा पुलवामा और पटना में हुआ |
अपना नाम कैसे चुनें
- पहले सर्च करें। IP India की पब्लिक ट्रेड मार्क सर्च में क्लास 32 देखें, जिसमें "मिनरल और एरेटेड वाटर तथा अन्य नॉन-अल्कोहलिक ड्रिंक्स" आते हैं। एक जैसे नाम, मिलती-जुलती आवाज़ वाले नाम और हिंदी वर्तनी भी जाँचें।
- नकल जैसे नाम से बचें। किसी जाने-माने ब्रांड से सिर्फ़ एक अक्षर, बदली हुई मात्रा या "Herbal", "Plus" जैसे जोड़े गए शब्द का फ़र्क़, यही पैटर्न पटना में पकड़ा गया।
- लेबल का डिज़ाइन कॉपी न करें। किसी प्रसिद्ध लेबल जैसे रंग और लेआउट से भी वही समस्या हो सकती है।
- जल्दी फ़ाइल करें। IP India की आधिकारिक फ़ीस के अनुसार TM-A आवेदन ऑनलाइन करने पर व्यक्ति, स्टार्टअप या छोटे उद्यम के लिए 4,500 रुपये प्रति क्लास और अन्य आवेदकों के लिए 9,000 रुपये प्रति क्लास है।
अगर आप किसी और के ब्रांड के लिए पैकिंग करते हैं
कॉन्ट्रैक्ट पैकिंग आम है, लेकिन काग़ज़ों से साफ़ दिखना चाहिए कि ब्रांड किसका है। लिखित एग्रीमेंट और ब्रांड मालिक की लेबल आर्टवर्क मंज़ूरी फ़ाइल में रखें, और लेबल पर ब्रांड मालिक व मैन्युफ़ैक्चरिंग यूनिट के वे विवरण हों जो FSSAI लेबलिंग नियम माँगते हैं। ज़रूरी बिंदु हमारी लेबल चेकलिस्ट में हैं।
वाटर प्लांट मालिकों के लिए इसका मतलब
- पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर FSSAI की हाई-रिस्क श्रेणी में है (29 नवंबर 2024 का आदेश), इसलिए जाँच बार-बार होती है और प्लांट के साथ लेबल भी देखे जाते हैं। देखें हाई-रिस्क नियम क्या माँगते हैं।
- लेबल पर लाइसेंस नंबर आपका अपना FSSAI लाइसेंस होना चाहिए, जो उसी परिसर में पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर को कवर करता हो।
- लेबल या कार्टन ऑर्डर करने से पहले ब्रांड नाम तय करें, और पहले से छपे रैपर तब तक न लें जब तक यह पक्का न हो कि नाम किसका है।
- नोटिस मिले तो तय समय में दस्तावेज़ों के साथ जवाब दें। पुलवामा में यूनिट को तीन दिन दिए गए थे।
- बाक़ी फ़ाइल भी अपडेट रखें: CGWA NOC, CTE/CTO और प्लांट के सभी लाइसेंस।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल: पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर ब्रांड नाम
क्या मैं किसी जाने-माने वाटर ब्रांड से मिलता-जुलता नाम रख सकता हूँ?
यह जोखिम भरा है। धोखा देने वाले ढंग से मिलता-जुलता नाम या लेबल FSS अधिनियम की धारा 3(1)(zf) के तहत उत्पाद को "मिसब्रांडेड" बना सकता है (धारा 52 में 3 लाख रुपये तक जुर्माना), और मार्क का मालिक ट्रेड मार्क्स अधिनियम, 1999 के तहत कार्रवाई कर सकता है।
पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर किस ट्रेडमार्क क्लास में आता है?
क्लास 32, जिसमें मिनरल और एरेटेड वाटर तथा अन्य नॉन-अल्कोहलिक ड्रिंक्स आते हैं।
वाटर ब्रांड का ट्रेडमार्क फ़ाइल करने की सरकारी फ़ीस कितनी है?
ऑनलाइन TM-A आवेदन के लिए IP India के अनुसार व्यक्ति, स्टार्टअप या छोटे उद्यम के लिए 4,500 रुपये प्रति क्लास और अन्य आवेदकों के लिए 9,000 रुपये प्रति क्लास।
बोतल पर किसका FSSAI लाइसेंस नंबर छपेगा?
उस यूनिट का लाइसेंस जो पानी बनाती और पैक करती है, और जो उसी परिसर में पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर को कवर करता हो। कॉन्ट्रैक्ट पैकिंग में FSSAI लेबलिंग नियमों के अनुसार ब्रांड मालिक का विवरण भी देना होता है।
ClearPath Compliance India कैसे मदद कर सकता है
हम पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर प्लांट के लिए FSSAI लाइसेंस तैयार और फ़ाइल करते हैं, FSSAI और लीगल मेट्रोलॉजी के अनुसार लेबल की समीक्षा करते हैं, और CGWA NOC, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सहमति, फ़ैक्टरी लाइसेंस और फ़ायर NOC का काम संभालते हैं। ट्रेड मार्क सर्च और फ़ाइलिंग किसी रजिस्टर्ड ट्रेड मार्क एजेंट या वकील से कराना बेहतर है; नाम तय होने के बाद हम लाइसेंस, लेबल और प्लांट रिकॉर्ड उसी के अनुसार मिलाते हैं। अपने प्लांट के बारे में बात करने के लिए कोटा से हमें कॉल या WhatsApp करें।
स्रोत
- Patna Press, 15 अक्टूबर 2026: बिहार खाद्य सुरक्षा विभाग ने 15,340 लीटर पैकेज्ड पानी ज़ब्त किया
- 22Scope News, 14 अक्टूबर 2026: पटना पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर रेड
- Kashmir Observer, 28 सितंबर 2026: लस्सीपोरा में बोतलबंद पानी यूनिट सील
- खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006, धारा 3 (परिभाषाएँ)
- खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006, धारा 52 (Indian Kanoon)
- ट्रेड मार्क्स अधिनियम, 1999, धारा 103
- IP India: ट्रेड मार्क फ़ॉर्म और आधिकारिक फ़ीस
यह केवल सामान्य जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं। तथ्य, फ़ीस और दंड बताई गई तारीख़ों पर प्रकाशित या रिपोर्ट किए गए अनुसार हैं; कोई भी कदम उठाने से पहले मौजूदा अधिनियम, FSSAI नियम और आधिकारिक फ़ीस सूची देखें। समाचार रिपोर्टों से लिए गए नाम केवल रिपोर्ट की गई कार्रवाई बताने के लिए दिए गए हैं; किसी ब्रांड का आकलन नहीं किया गया है, और सभी ब्रांड नाम उनके मालिकों के ट्रेडमार्क हैं जिनका उपयोग केवल पहचान के लिए है। यह लेख किसी ब्रांड या संस्था द्वारा प्रायोजित या समर्थित नहीं है।